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Showing posts from June, 2020

मनरेगा मजदूरों का संघर्ष और उनकी मांगे

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मनरेगा मजदूरों का संघर्ष और उनकी मांगे कोरोना की वजह से हुई तालाबंदी के कारण बहुत सारे महिला और पुरुष मजदूर गांव में मनरेगा स्कीम के तहत जुड़े हुए हैं जहां सैकड़ों समस्याओं ने उनकी जिंदगी को और दयनीय बना दिया है आज मनरेगा मजदूरों ने मनरेगा मजदूर यूनियन के नेतृत्व में SDM गोहाना आशीष कुमार जी से मिले और उनके माध्यम से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नाम ज्ञापन सौंपा। यूनियन की तरफ से रेखा रानी ने कहा कि कोरोना की वजह से हुई तालाबंदी के दौरान फैक्ट्रीयों में छंटनी शुरु हो चुकी है जिसकी वजह से मजदूर परिवारों में बेरोजगारी बढ़ी है जिसको ध्यान में रखते हुए काम के दिन 100 से बढ़ाकर 200 किये जायें। संतोष ने कहा कि अब मनरेगा के तहत अर्द्धकुशल के साथ साथ कुशल काम भी करवाया जाने लगा है और मनरेगा को भी मिनिमम वेज से जोड़ा जाये और दिहाड़ी 309 रू से बढ़ाकर 800 रू किये जाये। मन्दीप ने मांग की कि हमें गांव के अन्दर ही काम दिया जाए और मजदूरों का बीमा किया जाये। यूनियन के प्रदेश कमेटी सदस्य सुमित ने मांग की कि मुआवजा 25000 रू से बढ़ाकर 10 लाख रुपए किया जाये और तमाम जरूरी सामान भी कार्यस्थल...

भारत-नेपाल विवाद और कालापानी का सच

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भारत-नेपाल विवाद और कालापानी का सच आनंद स्वरूप वर्मा नवम्बर 1814 से मार्च 1816 तक नेपाल (जिसे उस समय गोरखा अधिराज्य कहा जाता था) और भारत पर शासन कर रही ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच युद्ध चला जिसमें नेपाल को पराजय का सामना करना पड़ा। 4 मार्च 1816 को सम्पन्न सुगौली संधि के साथ इस युद्ध का समापन हुआ और संधि के फलस्वरूप नेपाल को अपने एक तिहाई हिस्से से हाथ धोना पड़ा। संधि से पहले तक जो नेपाल का भू-भाग था वह ब्रिटिश भारत में शामिल कर लिया गया। नेपाल, जो कभी किसी का उपनिवेश नहीं रहा, अब भी एक स्वतंत्र राष्ट्र तो था लेकिन संधि के अनुसार काठमांडो में स्थायी तौर पर एक ब्रिटिश रेजिडेंट की नियुक्ति हुई और ब्रिटिश सेना के लिए गोरखा सैनिकों की भर्ती की प्रथा शुरू हुई। वैसे भी ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का मकसद तिब्बत तक व्यापार के लिए रास्ता तैयार करना था। सुगौली संधि की धारा 5 के अनुसार महाकाली नदी के पूर्व का क्षेत्र नेपाल के हिस्से में आया और इसके पश्चिम का सारा क्षेत्र ब्रिटिश भारत में मिल गया। इस संधि में लिंपियाधारा को महाकाली नदी का स्रोत बताया गया है। कालापानी और लीपुलेख महाकाली नदी के पू...

गांव कोहला के सरपंच द्वारा किया गया फर्जीवाड़ा

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गांव कोहला(सोनीपत) के सरपंच द्वारा किया गया फर्जीवाड़ा 13 लाख 72 हजार ₹572 की मजदूरी का कोई अता पता नहीं(Rs.13,72,542) पूरा मामला यह है कि गांव के सरपंच जगदीप बांगड़ ने सितंबर ,अक्टूबर 2017 में गांव के मजदूरों से मनरेगा का नाम लेकर 142 मजदूरों से 40 से 50 दिन तक लगातार काम करवाया और बाद में दिहाड़ी दिलवाने से मुकर गया ।सरपंच ने यह काम बिना डिमांड फार्म लिए और बिना मस्टर रोल निकलवाए करवाया । इस फर्जीवाड़े में गांव के ही 2 पंच अजीत %रामकुवांर ,सुनील % रामचंद्र भी शामिल है ।दोनों पंचों ने मजदूरों की दिहाड़ी रजिस्टर में चढ़ाई थी। अपने चहेतों के खाते में डलवाए मजदूरों के पैसे:- मनरेगा मजदूर यूनियन का आरोप है कि सरपंच और पंचों ने अपने चहेतों के जॉब कार्ड बनवा कर उनके खाते में पैसे डलवाये हैं । जिनके खाते में पैसे आए हैं उन्होंने हकीकत में कोई काम नहीं किया है और वें अधिकतर खुद को गांव का रसूखदार आदमी मानते हैं. अगर सरपंच मजदूरों की दिहाड़ी नहीं देता है तो मनरेगा मजदूर यूनियन कोर्ट तक जाएगी। मनरेगा मजदूर यूनियन पिछले 8 साल से प्रदेश के 6  जिलों में मजदूरों के अधिकारों के लिए...