ऑनलाइन शिक्षा माध्यम की जमीनी हकीकत
"वर्तमान समय में छात्र-छात्राओं , बुद्धिजीवियों में आनलाईन शिक्षा , आनलाईन परिक्षा के संबंध मे एक बहस छिडी हुई है।मध्यम वर्गीय छात्र-छात्राओं का एक छोटा तबका जो आर्थिक तौर पर मजबूत और तकनीकी कौशल का ज्ञान रखता है सिर्फ वही आनलाईन परिक्षा के लिए सहमत है । लेकिन छात्र-छात्राओं का बहुत बड़ा तबका जो सामान्य मजदूर -किसान परिवारों से आता है और सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी रूप से पिछड़ेपन को झेल रहा है ,आनॅलाइन परिक्षा माध्यम के पक्ष में नहीं हैl शिक्षा ,शिक्षण पद्धति का सवाल समाज के बौद्धिक विकास के साथ सीधे रूप से जुड़ा हुआ है ।ज्ञान का आधार उत्पादन व्यवस्था के साथ जुड़ा हुआ है। ऐतिहासिक रूप से हर व्यवस्था में ऐसा विशेष वर्ग रहा है जिसका संसाधनों पर कब्जा रहा है। राज्य तंत्र के विकास का अर्थ उस विशेषाअधिकारी वर्ग का ही विकास है जिसमें व्यापक जनता से किसी तरह का सरोकार नहीं रखा जाता। तमाम तरह के नियम, कानून ,सुविधाएं विशेष वर्ग को केंद्र में रखकर बनाई जाती हैं ताकि तथाकथित 'चौतरफा विकास' की अवधारणा स्थापित की जा सके। आधुनिकता के नाम पर ...