श्रम कानूनों में बदलाव के खिलाफ मेहनतकश जनता का संयुक्त अभियान

श्रम कानूनों में बदलाव के खिलाफ मेहनतकश जनता का संयुक्त अभियान


9 अगस्त 2020,को अखिल भारतीय विरोध प्रदर्शन में शामिल हों


श्रम कानूनों में बदलाव के साथ ही सभी न्यायपसंद लोगों द्वारा मिलकर सरकार की तानाशाही का जवाब देने के लिए गांव-गांव, बस्तियों, शहरों में जनसभाओं का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें देश के तमाम हिस्सों में काम करने वाले मजदूर संगठन, ट्रेड यूनियन, छात्र संगठन शामिल हैं। हरियाणा में मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान मासा के तहत बहुत सारे संगठन जमीनी स्तर पर लगातार मजदूरों छोटे किसानों दुकानदारों दिहाड़ी मजदूरी करने वालों के बीच गांव अभियान के तहत जा रहे हैं। जहां सरकार की जन विरोधी नीतियों का असर साफ तौर पर देखा जा सकता है। गांव में बहुत बड़ी तादाद में लोक डाउन में हुई छंटनी के दौरान घर वापस आए मजदूर मिलते हैं। ज्यादातर आबादी बेरोजगारी के साथ गरीबी और महंगाई के दौर में तंग हाल जिंदगी जीने को मजबूर हैं। गांव अभियान के दौरान यह बात सामने आई कि मनरेगा स्कीम के तहत कुछ गांव में काम चल रहा है लेकिन इस स्कीम के तहत लगभग हर गांव में बड़े-बड़े घोटालों को अंजाम दिया जा रहा है मजदूरों को काम का सही वेतन नहीं मिल पा रहा है स्कीम के तहत जिम्मेदार अधिकारी मजदूरों की मेहनत की कमाई को डकार रहे हैं।


गांव अभियान में जनसभा के दौरान एक बुजुर्ग महिला ने अपने हालात को बताते हुए कुछ इस कदर अपनी बात कही

साहब जी 2 महीने त छोरा घरां बैठ्या स , कंपनी न काड दिया, ईब खाण के भी लाले पड़ रहे हैं , हमने तो कोटे त भी नाज ना मिल्या । सरपंच न्यू बोल्या थारा कोन्या आरया


गांव अभियान के दौरान एक पर्चा बांटा गया जिसका कुछ अंश नीचे दिया जा रहा है और उसके साथ कुछ मांग जो मुख्य रूप से इस आंदोलन के केंद्र में रहेंगे:
 

साथियों ,

मजदूर वर्ग पर लगातार बढ़ते हमलों के बीच आई कोरोना महामारी के दौरान मोदी सरकार ने कोविड-19 के संक्रमण की बजाए देश की आम मेहनतकश जनता के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है। आनन-फानन में अनियोजित देशव्यापी लोकडॉन लागू कर मजदूर वर्ग व आमआबादी को अभूतपूर्व आर्थिक संकट में धकेल दिया है। परिवहन के साधन बंद किए जाने से दाने-दाने को मोहताज बेरोजगार अंत:प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने घर के लिए निकल पड़े। भूख ,प्यास ,थकान ,सड़क व रेल हादसों में सैकड़ों मजदूरों की जान चली गई 44 श्रम कानूनों को ध्वस्त कर 4 श्रम कोड थोपने की कोशिशों के साथ मजदूर वर्ग पर जारी हमलों को भाजपा नीत एनडीए सरकार तथा कांग्रेस पार्टी व अन्य दलों की राज्य सरकारों ने और भी तेज कर दिया है। यूपी ,एमपी ,गुजरात व हरियाणा सरकारों ने श्रम कानूनों को हजार दिन के लिए निलंबित कर दिया है देश के लगभग आधे राज्यों में कार्य दिवस 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे तक कर दिया गया है। आवाम में पनपे भारी असंतोष को भांपकर और बिहार चुनाव के मद्देनजर जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा जनता में उग्रराष्ट्रवाद तथा चीन -पाकिस्तान के खिलाफ युद्धोंन्माद फैलाया जा रहा है विपक्षी कांग्रेस भी युद्धोंन्माद का ही काम कर रही है। खाद्य पदार्थों, पेट्रोल-डीजल ,रसोई गैस व अन्य उपयोगी वस्तुओं की महंगाई चरम पर है ।विरोधी सरकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वालों को देशद्रोही घोषित कर दिया जेल में डाला जा रहा है पूंजीवादी शोषण के खिलाफ एकता को तोड़ने के उद्देश्य से सांप्रदायिक नफरत और हिंसा फैलाई जा रही है ।


हम मांग करते है कि

1.श्रम कानूनों में किए गए सभी मजदूर विरोधी संशोधन तत्काल रद्द किए जाएं विभिन्न राज्य सरकार द्वारा कार्य दिवस 12 घंटे किए जाने का मजदूर विरोधी फैसला रद्द किया जाए।

2.न्यूनतम वेतन ₹25000 किया जाए सभी बेरोजगारों को ₹15000 मासिक बेरोजगारी भत्ता दिया जाए।

3.लोकडाउन की अवधि का सभी मजदूरों को पूरा वेतन दिया जाए इसके चलते बेरोजगार हुए लोगों को ₹15000 प्रति परिवार सरकारी सहायता दी जाए तथा उनके रोजगार का प्रबंध किया जाए।

4.कोरोना संकट के बहाने उद्योग में लगातार की जा रही छंटनी और वेतन कटौती पर तत्काल रोक लगाई जाए निकाले गए मजदूरों और कर्मचारियों को वापस काम पर लिया जाए। हरियाणा के 1983 पीटीआई अध्यापकों की नौकरी बहाल की जाए

5.मनरेगा मजदूरी बढ़ाकर ₹800 दैनिक की जाए साल में प्रति व्यक्ति 200 दिन रोजगार की गारंटी दी जाए ।शहरी मजदूरों के लिए भी रोजगार गारंटी कानून बनाया जाए।

6.निजीकरण पर रोक लगाई जाए, ठेका प्रथा बंद की जाए

7.पेट्रोल ,डीजल व रसोई गैस के दाम कम किए जाएं बस व रेल का किराया घटाकर 2014 की दरों का दो तिहाई किया जाए।

8.विरोध करने के लोकतांत्रिक अधिकार पर हमला,अंध- राष्ट्रवाद व युद्ध उन्माद फैलाना तथा जाति, धर्म और क्षेत्र के आधार पर नफरत और विभाजन करने की राजनीति बंद की जाए ।UAPA,NSAऐसे जैसे काले कानून रद्द किए जाएं फर्जी मुकदमों द्वारा गिरफ्तार किए गए राजनीतिक कैदियों और CAA,NRCविरोधी आंदोलनकारियों को रिहा किया जाए।

मासा के घटक संगठन:

  1. ऑल इंडिया वर्कर काउंसल
  2. ग्रामीण मजदूर यूनियन बिहार
  3. इंडियन काउंसिल आफ ट्रेड यूनियंस
  4. इंडियन फेडरेशन आफ ट्रेड यूनियंस
  5. इफ्टू सर्वहारा
  6. जन संघर्ष मंच हरियाणा
  7. कर्नाटक श्रमिक शक्ति
  8. मजदूर सहयोग केंद्र (उत्तराखंड)
  9. मजदूर समन्वय केंद्र
  10. सोशलिस्ट वर्कर सेंटर (तमिलनाडु )
  11. स्ट्रगलिंग वर्कर्स कोआर्डिनेशन कमेटी (पश्चिम बंगाल)
  12. ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया


रिपोर्ट-अंकित

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