गांव कोहला के सरपंच द्वारा किया गया फर्जीवाड़ा

गांव कोहला(सोनीपत) के सरपंच द्वारा किया गया फर्जीवाड़ा


13 लाख 72 हजार ₹572 की मजदूरी का कोई अता पता नहीं(Rs.13,72,542)

पूरा मामला यह है कि गांव के सरपंच जगदीप बांगड़ ने सितंबर ,अक्टूबर 2017 में गांव के मजदूरों से मनरेगा का नाम लेकर 142 मजदूरों से 40 से 50 दिन तक लगातार काम करवाया और बाद में दिहाड़ी दिलवाने से मुकर गया ।सरपंच ने यह काम बिना डिमांड फार्म लिए और बिना मस्टर रोल निकलवाए करवाया ।इस फर्जीवाड़े में गांव के ही 2 पंच अजीत %रामकुवांर ,सुनील % रामचंद्र भी शामिल है ।दोनों पंचों ने मजदूरों की दिहाड़ी रजिस्टर में चढ़ाई थी।

अपने चहेतों के खाते में डलवाए मजदूरों के पैसे:-

मनरेगा मजदूर यूनियन का आरोप है कि सरपंच और पंचों ने अपने चहेतों के जॉब कार्ड बनवा कर उनके खाते में पैसे डलवाये हैं । जिनके खाते में पैसे आए हैं उन्होंने हकीकत में कोई काम नहीं किया है और वें अधिकतर खुद को गांव का रसूखदार आदमी मानते हैं. अगर सरपंच मजदूरों की दिहाड़ी नहीं देता है तो मनरेगा मजदूर यूनियन कोर्ट तक जाएगी।

मनरेगा मजदूर यूनियन पिछले 8 साल से प्रदेश के 6  जिलों में मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्षरत है। ऐसे मामले यूनियन ने पहले भी देखे हैं और केस भी जीते हैं। यूनियन की तरफ से मन्दीप ने कहा है कि वह संघर्ष में बिल्कुल भी पीछे नहीं हटेंगे.

अब सवाल यह है कि क्या गांव में कोई सच के पक्ष में खड़े होने वाला बचा भी है या नहीं?
(मनरेगा अधिनियम के तहत काम करते मजदूर)

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