ऑनलाइन शिक्षा माध्यम की जमीनी हकीकत







"वर्तमान समय में छात्र-छात्राओं , बुद्धिजीवियों में आनलाईन शिक्षा , आनलाईन परिक्षा के संबंध मे एक बहस छिडी हुई है।मध्यम वर्गीय छात्र-छात्राओं का एक छोटा तबका जो आर्थिक तौर पर मजबूत और तकनीकी कौशल का ज्ञान रखता है सिर्फ वही आनलाईन परिक्षा के लिए सहमत है । लेकिन छात्र-छात्राओं का बहुत बड़ा तबका जो सामान्य मजदूर -किसान परिवारों से आता है और सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी   रूप से पिछड़ेपन को झेल रहा है ,आनॅलाइन परिक्षा माध्यम के पक्ष में नहीं हैl




शिक्षा ,शिक्षण पद्धति का सवाल समाज के बौद्धिक  विकास के साथ सीधे रूप से जुड़ा हुआ है ।ज्ञान का आधार उत्पादन व्यवस्था के साथ जुड़ा हुआ है। ऐतिहासिक रूप से हर व्यवस्था में ऐसा विशेष वर्ग रहा है जिसका संसाधनों पर कब्जा रहा है। राज्य तंत्र के विकास का अर्थ उस विशेषाअधिकारी  वर्ग का ही विकास है जिसमें व्यापक जनता से किसी तरह का सरोकार नहीं रखा जाता। तमाम तरह के नियम, कानून ,सुविधाएं विशेष वर्ग को केंद्र में रखकर बनाई जाती हैं ताकि तथाकथित 'चौतरफा विकास' की अवधारणा स्थापित की जा सके।

आधुनिकता के नाम पर जिस तरह की शिक्षण नीतियां अपनाई जा रही हैं उससे स्पष्ट है शिक्षा का उद्देश्य समाज कल्याण ना होकर मुनाफे पर आधारित क्रय विक्रय का साधन बनाना मात्र रह गया है। पूंजीवादी व्यवस्था अपने आप में असमानता की खाई को बढ़ाने वाली होती है इसलिए सामाजिक आर्थिक सूक्ष्म विभाजन के नए-नए तरीके इजाद किए जाते हैं। शिक्षा का माध्यम ऑनलाइन व दूरस्थ किया जाना ना सिर्फ असमानता को बढ़ाना है बल्कि गरीब मेहनतकश जनता के साथ भद्दा मजाक भी है ।इसी से जुड़े कुछ तथ्यों से पड़ताल करने की कोशिश करेंगे क्या वाकई 'ऑनलाइन शिक्षा' वर्तमान समाज की बुनियादी जरूरतों से मेल खाती है या नहीं....





ऐसा कहना कतई सही नहीं होगा कि कोरोना महामारी के कारण ऑनलाइन शिक्षा को स्कूल ,कॉलेज तथा विश्वविद्यालय में लागू किया जा रहा है इसकी तैयारी बहुत पहले से चलती आ रही है। एक तरफ देश में शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षा का व्यापक जनता तक पहुंच का सवाल है तो दूसरी और घट रहे सार्वजनिक शिक्षण संस्थान ।
1 मई 2020 को यूजीसी की तरफ से वीडियो कांफ्रेंस के जरिए कुछ आंकड़े प्रस्तुत किए गए जिसमें UGC/MHRD द्वारा चलाए जा रहे ई- लर्निंग कोर्सेज, ऑनलाइन क्लासेस और डिजिटल लाइब्रेरी को 'उत्तम दर्जे' की शिक्षा के रूप में "रामबाण" की तरह प्रस्तुत किया।AIR( ऑल इंडिया रेडियो) के CEO शशि शेखर के अनुसार रेडियो आकाशवाणी के माध्यम से शिक्षा दी जा रही है जब उनसे पूछा गया कितने लोगों तक शिक्षा इस माध्यम से पहुंच रही है उन्होंने कहा "बहुत ज्यादा" ।
 भारत सरकार का ऑनलाइन शिक्षा के लिए आधार नई शिक्षा नीति 2019 में स्पष्ट किया गया है MOOCs (Massive Online Open Course) के माध्यम से सार्वजनिक व निजी शिक्षण संस्थाओं में ई- लर्निंग ,डिग्री प्रोग्राम ई-लाइब्रेरी और बहुत से कोर्स ऑनलाइन शिक्षा से जोडे जाने की योजना है ।

मार्च 2020 से ही सभी कॉलेज स्कूल विश्वविद्यालयों ने ऑनलाइन क्लास लेना अनिवार्य कर दिया है। जिसमें शिक्षकों ,छात्रों पर दबाव बनाया जा रहा है कि असाइनमेंट, टेस्ट से लेकर   text meter, pdf के माध्यम से पढ़ाई करवाई जाए। स्पष्ट रूप से फैसला जमीनी हकीकत से कटा हुआ है और गैर लोकतांत्रिक हैं ।निश्चित रूप से ऑनलाइन शिक्षा के लिए स्मार्टफोन ,लैपटॉप ,कंप्यूटर, हाई स्पीड इंटरनेट की आवश्यकता होगी देखते हैं तथ्य क्या कहते हैं.....




जिस तरह सरकार 'डिजिटल इंडिया' का हौवा खड़ा करती है 2011 के जनगणना के अनुसार भारत में सिर्फ 3.1% प्रतिशत घरों में कंप्यूटर ,लैपटॉप के साथ इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध है, इसी में अगर ग्रामीण क्षेत्र की बात की जाए तो सिर्फ 0.07 प्रतिशत रह जाता है। स्मार्टफोन की बात की जाए तो भारत में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले कुल यूजर 373. 8 मिलियन है यानी लगभग 37 करोड लोग 125 करोड़ की जनसंख्या में सिर्फ 30% लोग हैं ।ग्लोबल सर्वे 2018 के अनुसार 24% लोगों के पास स्मार्टफोन है ।देश महिलाओं के इंटरनेट सर्फिंग में बहुत पिछडा हुआ है ।पुरुषों की तुलना में महिलाओं की इंटरनेट तक पहुँच में बहुत गैर- बराबरी है। लगभग   30% महिलाएँ इंटरनेट इस्तेमाल करती है इसलिए सीधे तौर पर यह महिलाओं के खिलाफ भी है।




ग्रामीण, आदिवासी तथा अन्य पिछडे इलाकों में हालात बहुत खराब है ।(Financial express, Statista Department 2019 report)  शिक्षा पर 2017-18 के नेशनल सैंपल सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, केवल 24% भारतीय घरों में इंटरनेट की सुविधा है।  जबकि भारत की 66% आबादी गाँव में रहती है, केवल 15% ग्रामीण घरों में इंटरनेट सेवाओं की पहुंच है।  शहरी परिवारों के लिए अनुपात 42% है।

#मिशन अंत्योदय के सर्वे के अनुसार भारत के लगभग 20% क्षेत्र में 8 घंटे से कम बिजली रहती है ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा सर्वे में पाया गया 53% क्षेत्र में 12 घंटे से कम बिजली रहती हैं । 




ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ाने  का एक मुख्य पहलू इलेक्ट्रॉनिक समान (स्मार्टफोन ,कंप्यूटर, लैपटॉप, वाईफाई ) के लिए बहुत बड़े बाजार को बढ़ाना है जो सरकार के मुनाफा केंद्रित इरादों को साफ करता है ।इसे बड़ी मात्रा में स्मार्टफोन कंप्यूटर की मांग बढ़ जाएगी इसके अलावा ऑनलाइन क्लासेज, ऑनलाइन कोर्स के लिए बहुत बड़ी मात्रा में प्राइवेट कंपनियां मैदान में आ चुकी हैं ।तमाम तरह के कोचिंग सेंटर  नियमित पैकेज के हिसाब से करोड़ों का मुनाफा कूट रहे है। ग्रामीण क्षेत्र  में स्थानीय कोचिंग सेंटर किसी बडी फ्रम नाम से कमीशन का काम भी चला रहे हैं । इसके अलावा आनॅलाइन विडियो स्ट्रीमिंग के दौरान विज्ञापन देने की एक नयी संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है ।जिससे मुनाफे की एक नई कड़ी जुडती है इन्हीं विज्ञापनों मे सामान बेचने के लिए  अश्लील चलचित्र के साथ महिलाओं का इस्तेमाल किया जाता है । जो नई पीढ़ी के दिमाग को कुंद करने का काम करती है और पर्दे के पीछे विज्ञापन कंपनियाँ करोड़ों का मुनाफा कमाती है।

स्कूली शिक्षा पर प्रभाव

स्कूल किसी भी विधार्थी के लिए ऐसी जगह होती है जहां सीखने की अपार संभावनाएं मौजूद रहती है । अध्यापकों और अन्य सहपाठियों के साथ मिलकर समाजीकरण की बुनियादी प्रक्रिया का हिस्सा बनता है । पहले से शिक्षा उत्पादन प्रक्रिया से कटती जा रही है, आनलाईन शिक्षा विधार्थी को आमने-सामने और सामुहिक संवाद से काटने का काम कर सकती है।

अंकित

(कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के छात्र संगठन में कार्यरत)

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