दमनकारी कानूनों के खिलाफ उठ रही आवाज


लंबे समय से छात्रों, नौजवानों, शिक्षकों, वकीलों आदि लोगों को, जो जनता के हकों की आवाज उठाते हैं, सरकार की गलत नीतियों की आलोचना करते हैं, यूएपीएUAPA व एनएसएNSAजैसी खतरनाक आतंकवादी धाराएं लगाकर जेलों में डाला जा रहा है। जनता की आवाज उठाने वाले लोगों के भाषणों को गलत तरीके से तोड़ मरोड़ कर, उसी के खिलाफ सबूत के तौर पर प्रयोग किया जा रहा है। क्या देश की जनता की आवाज उठाने वाले लोगों से देश को खतरा हो सकता है? क्या यह जानते हुए भी की, एक आलोचना करने पर ही आपको जेल में डाला जा सकता है, अपनी जान की परवाह न करते हुए, जनता की दुख तकलीफो के सामने, अपने दुखों को भूल कर उनके लिए, उनके अधिकारों के लिए लड़ते हैं, क्या उनसे हमारे देश को खतरा है? सरकार तानाशाही रवैया अपनाते हुए अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबा देना चाहती है व कुछ चंद लोगों के फायदे के लिए सभी संसाधनों को बेचने पर अमादा है। सरकारी सेक्टर को लगातार प्राइवेट हाथों में सौंपा जा रहा है। रेलवे, रोडवेज, बिजली विभाग आदि को लगभग बेच दिया गया है। जो लोग सरकार की इन विनाशकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, उन्हें देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताकर जेलों में यातनाएं दी जा रही है। 

यूएपीएUAPA व एनएसएNSA जैसे काले कानूनों के खिलाफ सरकार का विरोध करने के लिए लोग सड़कों पर निकल रहे हैं। बीजेपी,RSS के विरोध में लोगों का हुजूम क्रांतिकारी नारों के साथ अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।


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